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    • Shah Nawaz
      Shah Nawaz' feed
      युद्ध जब होगा या नहीं होगा, पानी रोका जाएगा या नहीं रोका जाएगा, यह सब तो देखा जाएगा... पर पाकिस्तान से अम्बानियों/अडानियों का करोड़ों/अरबों का व्यापार तो बंद करिए मोदी जी!
      • राजीव कुमार झा
        वह मुझसे तक़रीबन पांच साल पहले मिली थी,पटना के डाक बंगला चौराहे पर.
        • Shah Nawaz
          Shah Nawaz' feed
          कट्टरता हक़ बात को क़ुबूल नहीं करने देती!
          • Sanjay Grover संजय ग्रोवर
            हर बार वह मसीहा पुरुष ही क्यों होता है, हर बार स्त्री वापिस उसी हालत और उन्हीं हालात में क्यों पहुंच जाती है, समझना ज़रुरी है। http://filmaurmai.blogspot.in/2016/09/parched.html
            • Shah Nawaz
              यह बकरीद या बकराईद नहीं बल्कि ईद-उल-अज़हा है और इसका क़ुर्बानी से कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, बल्कि यह ईद हज-मुबारक के पूरा होने की ख़ुशी में मनाई जाती है। वैसे भी अल्लाह को क़ुर्बानी पसंद है, उस तक गोश्त नहीं पहुँचता, गोश्त तो 'घरवालों, रिश्तेदारों...
              • राजीव कुमार झा
                होठों की हंसी देखे अंदर नहीं देखा करते किसी के गम का समंदर नहीं देखा करते
                • राजीव कुमार झा
                  यूँ ही कभी कविताओं और गजलों से संबंधित व्यक्तिगत ब्लॉग है.
                  • जन्मेजय तिवारी
                    'समाजवाद का प्रहसन' पढ़िए मेरी व्यंग्य रचना @ http://teer-a-nazar.blogspot.com ( स्थान- दरबार-ए-खास । महाराज सियार सिंहासन पर चिपके हुए हैं । मुट्ठियां हत्थों पर कसी हुई हैं । सामने आसनों पर महाराज के अपने लोग विराजमान हैं...)
                    • Sanjay Grover संजय ग्रोवर
                      अभी लड़की की हत्या हुई, हमला हुआ, भगवान नहीं आया। अगर भगवान होता तो हत्या या हमला होने ही क्यों देता !? http://nastiktheatheist.blogspot.in/2016/09/blog-post.html
                      • sanjeev jha
                        India’s First Hinglish Novel: Raiders of the Labyrinth या भूलभुलैया का रहस्य . आज से 2000 साल पहले एक रहस्यमयी Wheel की रक्षा करते हुए Nalanda University के Principal की मौत हो जाती है | 1992 में एक छोटा बच्चा विरासत में एक खौफनाक रहस्य...
                        • जन्मेजय तिवारी
                          'खटमल धीरे से जाना खटियन में' पढ़िए मेरी व्यंग्य रचना @ http://teer-a-nazar.blogspot.com जब से राजमाता लोमड़ी ने वानप्रस्थ आश्रम में जाने की तैयारी शुरु की है, तभी से अखिल जंगल दल का समूचा बल युवराज के सिर पर टूट पड़ा है...
                          • पीताम्बर शम्भू
                            निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
                            • जन्मेजय तिवारी
                              'लॉलीपाप की बुकिंग' पढ़िए मेरी व्यंग्य रचना @ http://teer-a-nazar.blogspot.com जब से राज ज्योतिषी ने अपनी पहली गणना का निष्कर्ष निकाला है, तब से महाराज सियार की रातों की नींद उड़ गई है । दिन में भयानक सपने दिखाई देने लगे हैं...
                              • प्रियदर्शिनी......
                                मृत्यु के बाद क्या ?? इसमें उलझे बगैर यदि हम अपने पूर्वजों की याद में वर्ष में १५ दिन सिर्फ़ १० मिनट निकाल कर उनको जल अर्पित करें .,उनका स्मरण करें.,तो कोई हर्ज नही . ऐसा करने से हमें एक अनूठा सुख ,संतोष प्राप्त. होगा ,जिनसे हम अलग हो चुके है.उनके हमारे आस-पास होने ,हमारे साथ होने का अहसास होगा..हम चाहें तो कभी भी ऐसा कर सकते हैं .पर हममें से किसी के पास इतनी फ़ुर्सत नहीं .इसलिये ,हिन्दु पचांग के अनुसार चुने हुए इन १५ दिनों में अपने पितरों ,पूर्वजों के लिये थोडा समय अवश्य निकालें ।.http://priyadarshinitiwari40.blogspot.com/2016/09/blog-post_37.html
                                • Sanjay Grover संजय ग्रोवर
                                  मां-बाप, तर्क और फ़िल्मी लोग http://filmaurmai.blogspot.in/2016/09/blog-post.html
                                  • प्रियदर्शिनी......
                                    आज बहुत से ऐसे देश भी है जो सिर्फ अपनी राष्ट्रिय भाषा के बलबूते तरक्की कर रहे है। हम भी कर सकते है , पर आज हमारे पास अपनी भाषा -हिंदी में तमाम विषयों पर किताबें तक उपलब्ध नहीं है , जिन्हें बच्चे पढ़कर विज्ञान , तकनीक या व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर...
                                    • Yogendra Joshi
                                      Yogendra Joshi' feed
                                      हिन्दी दिवस, २०१६ आज हिन्दी दिवस है, १४ सितंबर। सन्‍ १९५० से आज तक ६६ वर्षों से हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है, एक ही ढर्रे से। ... आगे पढ़ें : https://hinditathaakuchhaur.wordpress.com/2016/09/14/
                                      • जन्मेजय तिवारी
                                        'झूठ बोलने वाले झुनझुने किसी के पास नहीं' पढ़िए मेरी व्यंग्य रचना @ http://teer-a-nazar.blogspot.com उत्तर से प्रश्न बन गया प्रदेश अपनी रोनी सूरत लिए खड़ा है । आँखों में उसके पानी है, मुँह में वही कहानी है । वह खड़ा है चौराहे पर...
                                        • mrs. ritu asooja Rishikesh
                                          बकरा ईद की सबको बधाई । जब हम स्कूल मे पड़ते थे ,तभी से हमारे स्कूलों में जिस तरह होली ,दिवाली दशहरा,आदि त्योहारों की छुट्टी होती आ रही है उसी तरह मीठी ईद ,बकरा ईद की भी छुट्टी होती है आज भी । त्यौहार कोई भी हो मेरा दिल हर्षोल्लास से भर जाता जाता है...
                                            • Shah Nawaz
                                              Shah Nawaz

                                              यह बकरीद या बकराईद नहीं बल्कि ईद-उल-अज़हा है और इसका क़ुर्बानी से कोई सीधा ताल्लुक नहीं है, बल्कि यह ईद हज-मुबारक के पूरा होने की ख़ुशी में मनाई जाती है। वैसे भी अल्लाह को क़ुर्बानी पसंद है, उस तक गोश्त नहीं पहुँचता, गोश्त तो 'घरवालों, रिश्तेदारों और गरीबों' के लिए होता है और अपने पैसे से उनके लिए खाने के इंतज़ाम की नियत का नाम ही 'क़ुर्बानी' है! और यह क़ुर्बानी यानि उपरोक्त तीन तरह के लोगों के लिए खाने का इंतज़ाम सिर्फ उन्ही लोगो के लिए है जो इतनी हैसियत रखते हैं, सबके लिए नहीं है।

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