Prerak Prasang in Hindi...महात्मा बुद्ध , महात्मा गाँधी , एक राजा... - AmulyaKhabar.com ► Best Blog For Motivational Stories In Hindi, Hindi Quotes , Hindi Articles etc.

2 Views
    amulyakhabar
    By amulyakhabar

    Categories: Stories

    http://www.amulyakhabar.com/2017/04/prerak-prasang-in-hindi.html

    Prerak Prasang in Hindi...महात्मा बुद्ध , महात्मा गाँधी , एक राजा...

     
    image







    Prerak Prasang in Hindi...महात्मा बुद्ध , महात्मा गाँधी , एक राजा...
    Posted on 21.04.2017 By: Deep Singh Yadav


    दोस्तो, नीचे तीन प्रेरक प्रसंग लिखे हैं उम्मीद करता हूँ कि आप इनको पढ़कर अवश्य लाभ उठायेंगे तथा सोशल मीडिया पर शेयर करके अपने दोस्तों को भी बतायेंगे ताकि वो भी इसका लाभ ले सकें। धन्यवाद.


     

    
     



    1. प्रेरक प्रसंग ---महात्मा बुद्ध


    एक बार तथागत बुद्ध वैशाली पहुंचे। समाचार सुनकर वहाँ की प्रसिद्ध नृत्यांगना आम्रपाली भी उनके उपदेश सुनने पहुँची। तथागत एक वृक्ष की छाया में बैठे थे और हजारों लोग उनके उपदेश सुन रहे थे। उपदेश समाप्त होने पर  आम्रपाली ने नतमस्तक होकर तथागत को अपने यहाँ  भोजन पर आमंत्रित किया। वह बोली, "तथागत! आपके चरण कमलों से इस दासी की कुटिया पवित्र हो जायेगी।"

    तथागत ने आम्रपाली की प्रार्थना स्वीकार कर ली। वहाँ उपस्थित राजकुमारों को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा, “यह वेश्या है, आपके चरणों के योग्य नहीं है।  तथागत के लिए राजा और वेश्या में क्या अंतर है? तथागत सम्दृष्टि हैं।”

     ख़ुशी से दीवानी आम्रपाली से राजकुमारों ने कहा, "आम्रपाली  हम तुझको एक लाख स्वर्ण मुद्रा देंगे, तू तथागत को कल के भोजन के लिए हमारे यहाँ आने दो।"
    आम्रपाली ने उत्तर दिया, ‘आर्य पुत्रों यह नहीं हो सकता। यदि आप समस्त साम्राज्य भी मुझे दे देते, तो भी मै इस निमंत्रण को नहीं बेच सकती। यह गौरव बेचने या अदला बदली करने की चीज़ नहीं है।
    आम्रपाली ने बुद्ध के प्रति अनुपम श्रृद्धा दिखाई और भोजन के बाद अपने आम्र उपवन को बुद्ध और भिछु संघ के लिए समर्पित कर दिया और स्वयं भी भिछुणी हो गयी।

    Also read... Prerak Prasang in hindi >>> समस्याओं में ही समाधान है


    2. प्रेरक प्रसंग--- महात्मा गाँधी
     Image result for mahatma gandhi image


    महात्मा गाँधी जी ने प्रारंभ में ही छुआछूत की आलोचना तो की परन्तु जाति के संबंध में पूर्व से चले आ रहे नियमों को वैसे ही रहने दिया। कुछ समय बाद उन्होंने दलितो के मंदिर में प्रवेश को लेकर आन्दोलन चलाया तथा साँझा भोज पर बल दिया। बहुत बाद में अपने आश्रम में एक दलित और एक सर्वण के विवाह की अनुमति दी।

    भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन की अगुयाई कर रही कांग्रेस गाँधी जी द्वारा दलितों के सामाजिक उत्थान हेतु चलाये गये इन कदमों से सहमति नहीं रखती थी क्योंकि उसका मानना था कि ‘सामाजिक सुधार’ को ‘स्वतंत्रता आन्दोलन’ से पृथक रखा जाना चाहिये।

    कांग्रेस के इस रवैये के कारण डॉ भीमराव अम्बेडकर अँग्रेजी राज का साथ दे रहे थे और भारत छोड़ो आन्दोलन के समय वे वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य होते थे इतना ही नहीं वे गाँधी के प्रखर आलोचक भी थे और उनके  विरुद्ध अपमानजनक और विवादास्पद भाषा का प्रयोग किया करते थे। अपने इस व्यवहार के पीछे उनका मानना था कि कांग्रेस के ब्राह्मण बाहुल्य ढाँचे से दलितों का भला नहीं हो सकता । (अम्बेडकर के पूर्वज भी लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सेना में कार्यरत थे और भीमराव के पिता रामजी अम्बेडकर ब्रिटिश फ़ौज में सूबेदार थे)

    1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ तो डॉ. अम्बेडकर के इसी प्रकार के विचारों के चलते कांग्रेस के नेतागण विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल उन्हें अपने पहले मंत्रिमंडल में साथ रखने को तैयार न थे परन्तु गांधी जी ने हस्तक्षेप करके यह समझाने का प्रयास किया कि कि आज़ादी कांग्रेस को नहीं मिली है अपितु देश को मिली है इसलिये पहले मंत्रिमंडल में सबसे अच्छी प्रतिभाओं को शामिल किया जाना चाहिये चाहे वह किसी भी दल अथवा समुदाय की ही क्यों न हो। गाँधी के इस सकारात्मक हस्तक्षेप के बाद ही डॉ. अम्बेडकर देश के पहले कानून मंत्री बन सके थे। गाँधी जी के लिये मन में किसी के लिये बैर अथवा पूर्वाग्रह नहीं था इसीलिये उन्हें महामानव कहा गया।
     

    Also read...Prerak Prasang in Hindi >> अहंकार


    3. प्रेरक प्रसंग--- ‍‍‌बुद्धिमान कौन
     Image result for budhiman image in hindi
      बादशाह ने वजीर के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवार बुलवाए।  परीक्षा से गुज़र कर तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए।

    तीनों उम्मीदवारों से बादशाह ने एक-एक कर एक ही सवाल किया, ‘मान लो मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एक साथ आग लग जाए तो तुम क्या करोगे?’
    पहले ने उत्तर दिया, "जहाँपनाह, पहले मैं आप की दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"
    दूसरा ने कहा, "जहाँपनाह पहले मैं अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"

    तीसरे उम्मीदवार ने उत्तर दिया, "जहाँपनाह, मैं एक हाथ से आपकी दाढ़ी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"

    इस पर बादशाह ने कहा, "अपनी ज़रूरत को नज़रंदाज़ करने वाला नादान है। सिर्फ़ अपनी भलाई चाहने वाला स्वार्थी है और जो व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाते हुए दूसरे की भलाई करता है, वही बुद्धिमान है।"
    इस तरह बादशाह ने वजीर के पद पर तीसरे उम्मीदवार की नियुक्ति कर दी।
     
    Also read...Prerak Prasang in hindi >>>नीयत में खोट